भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का बाजार इस समय अपनी सबसे तेज रफ्तार में है। जहाँ एक ओर पैसेंजर कारों के सेगमेंट में हलचल है, वहीं दूसरी ओर ‘कमर्शियल व्हीकल’ सेगमेंट में भी एक बड़ी क्रांति खामोशी से आकार ले रही है। इसी कड़ी में, हीरो मोटोकॉर्प समर्थित स्टार्टअप यूलर मोटर्स (Euler Motors) ने अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए ₹687.5 करोड़ की सीरीज ई (Series E) फंडिंग जुटाई है।
यह निवेश Euler Motors EV Manufacturing Scale up की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है। इस भारी-भरकम राशि का उपयोग कंपनी अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के विस्तार, नए प्रोडक्ट्स के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और अपने नेटवर्क को देश भर में फैलाने के लिए करेगी। यूलर मोटर्स का लक्ष्य केवल गाड़ियां बेचना नहीं, बल्कि भारत के लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सेक्टर को पूरी तरह से ‘ग्रीन’ बनाना है।
फंडिंग का गणित: किसे कितनी मिली हिस्सेदारी?
यूलर मोटर्स ने इस राउंड में कुल ₹687.5 करोड़ जुटाए हैं, जिसे दो हिस्सों में बांटा गया है:
- इक्विटी फंडिंग (₹437.5 करोड़): इस निवेश का नेतृत्व ‘लाइटरॉक’ (Lightrock) ने किया है। इसमें हीरो मोटोकॉर्प और ब्लूम वेंचर्स (Blume Ventures) ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है।
- डेट फंडिंग (₹250 करोड़): यह राशि ब्लैकसॉयल (BlackSoil), ट्राइफेक्टा (Trifecta), इनोवेन (InnoVen) और अल्टेरिया कैपिटल (Alteria Capital) जैसे कर्जदाताओं से मिली है।
साल 2018 में शुरू हुई इस कंपनी ने अब तक लगभग ₹1,900 करोड़ का कुल निवेश जुटा लिया है। कंपनी के फाउंडर और सीईओ सौरव कुमार का कहना है कि वे वित्त वर्ष 2025 के ₹191 करोड़ के राजस्व के मुकाबले इस साल 100% की ग्रोथ देख रहे हैं।
हीरो मोटोकॉर्प का भरोसा: एक गेम-चेंजर पार्टनरशिप
यूलर मोटर्स की सफलता के पीछे भारत की सबसे बड़ी टू-व्हीलर कंपनी हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) का बड़ा हाथ है। हीरो मोटोकॉर्प की यूलर मोटर्स में 34.1 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी है।
सौरव कुमार के अनुसार, हीरो मोटोकॉर्प केवल पैसा ही नहीं, बल्कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का वह गहरा अनुभव और रणनीतिक मार्गदर्शन भी लाता है जिसकी एक बढ़ते हुए स्टार्टअप को सख्त जरूरत होती है। हीरो की मदद से कंपनी को प्रोक्योरमेंट (कच्चे माल की खरीद), फाइनेंसिंग और नेटवर्क डेवलपमेंट में काफी मदद मिल रही है।
हीरो मोटोकॉर्प के सीईओ हर्षवर्धन चितले ने भी इस साझेदारी पर खुशी जताते हुए कहा कि यूलर मोटर्स का इनोवेशन और ऑपरेशनल उत्कृष्टता उनके विजन के साथ पूरी तरह मेल खाती है।
हरियाणा के पलवल में मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार
Euler Motors EV Manufacturing Scale up के तहत कंपनी अपने पलवल (हरियाणा) स्थित प्लांट में तीसरी प्रोडक्शन लाइन जोड़ रही है। यह नई लाइन विशेष रूप से इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर्स (e4W) के लिए समर्पित होगी।
- मौजूदा क्षमता: फिलहाल कंपनी हर महीने लगभग 1,000 वाहनों का निर्माण कर रही है।
- नई क्षमता: तीसरी यूनिट जुड़ने के बाद, हर महीने 1,000 अतिरिक्त वाहनों के निर्माण की क्षमता बढ़ जाएगी।
- R&D निवेश: कंपनी ने अगले 18 महीनों के लिए अनुसंधान (R&D) और फैक्ट्री निवेश के लिए ₹400 करोड़ का बजट अलग रखा है।
यूलर मोटर्स ने हाल ही में अपने नए इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर्स जैसे Turbo EV1000 और Storm को लॉन्च किया है, जिन्हें ग्राहकों से शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है।
विजन 2030: टॉप-3 खिलाड़ियों में शामिल होने का लक्ष्य
यूलर मोटर्स का सपना बड़ा है। सौरव कुमार का कहना है कि उनका लक्ष्य साल 2030 तक भारत के इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल (e-CV) सेगमेंट में टॉप-3 खिलाड़ियों में शामिल होना है। इस लक्ष्य को पाने के लिए कंपनी केवल असेंबली पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह “लोकल फॉर वोकल” पर ध्यान दे रही है।
सप्लाई चेन और स्थानीयकरण (Localisation)
ग्लोबल सप्लाई चेन के जोखिमों से बचने के लिए यूलर मोटर्स अब स्वदेशी पार्ट्स के निर्माण पर जोर दे रही है। इससे न केवल गाड़ियों की लागत कम होगी, बल्कि उनकी परफॉर्मेंस में भी सुधार आएगा। जिस तरह भारत में Electric Truck Manufacturing in India को सरकारी नीतियों से बढ़ावा मिल रहा है, यूलर मोटर्स भी उसी लहर का फायदा उठा रही है।
AI और ऑटोमेशन का जादू
आधुनिकता को अपनाते हुए, कंपनी अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन का इस्तेमाल कर रही है। इसमें ‘विजन-बेस्ड क्वालिटी चेक’ शामिल है, जिससे गाड़ियों में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट होने की संभावना न के बराबर हो जाती है।
भारतीय बाजार पर प्रभाव: छोटे शहरों तक पहुँच
इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों की मांग केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। जैसा कि हमने MG Windsor EV Sales in India के मामले में देखा था कि 70% मांग गैर-मेट्रो शहरों से आ रही है, यूलर मोटर्स भी अपने नेटवर्क को टियर-2 और टियर-3 शहरों में फैलाने की योजना बना रही है।
छोटे व्यापारियों और डिलीवरी पार्टनर्स के लिए यूलर की गाड़ियां एक किफायती विकल्प साबित हो रही हैं। डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच, इलेक्ट्रिक कमर्शियल गाड़ियां चलाने की लागत (Operating Cost) काफी कम होती है, जो सीधा मुनाफे में बदलती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
यूलर मोटर्स द्वारा जुटाई गई ₹687.5 करोड़ की यह फंडिंग इस बात का प्रमाण है कि निवेशकों को भारत के इलेक्ट्रिक ट्रांजिशन पर पूरा भरोसा है। Euler Motors EV Manufacturing Scale up के माध्यम से कंपनी न केवल अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा रही है, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। हीरो मोटोकॉर्प का साथ और AI जैसी तकनीकों का समावेश यूलर मोटर्स को भविष्य की एक मजबूत कंपनी के रूप में स्थापित कर रहा है।
आने वाले समय में, जब आप अपने शहर की सड़कों पर खामोशी से सामान पहुंचाते हुए इलेक्ट्रिक ट्रकों को देखेंगे, तो समझ जाइयेगा कि हरित क्रांति की शुरुआत हो चुकी है।
क्या आपको लगता है कि यूलर मोटर्स 2030 तक टॉप-3 ईवी कंपनियों में शामिल हो पाएगी? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. यूलर मोटर्स का मुख्य मैन्युफैक्चरिंग प्लांट कहाँ है?
यूलर मोटर्स का मुख्य मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हरियाणा के पलवल में स्थित है, जहाँ कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए लगातार विस्तार कर रही है।
2. हीरो मोटोकॉर्प की यूलर मोटर्स में कितनी हिस्सेदारी है?
हीरो मोटोकॉर्प की यूलर मोटर्स में 34.1 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी है, जो इसे कंपनी का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार बनाती है।
3. यूलर मोटर्स के लोकप्रिय मॉडल कौन से हैं?
यूलर मोटर्स के सबसे चर्चित मॉडलों में ‘HiLoad EV’ (थ्री-व्हीलर) और हाल ही में लॉन्च हुए ‘Turbo EV1000’ और ‘Storm’ (फोर-व्हीलर) शामिल हैं।
4. क्या यूलर मोटर्स की गाड़ियां लंबी दूरी के लिए उपयुक्त हैं?
हाँ, यूलर की नई फोर-व्हीलर रेंज को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे भारी लोड के साथ भी अच्छी रेंज और परफॉर्मेंस दे सकें, जो इंटर-सिटी डिलीवरी के लिए उपयुक्त है।
5. यूलर मोटर्स की गाड़ियों में AI का क्या उपयोग है?
कंपनी AI का उपयोग मैन्युफैक्चरिंग के दौरान क्वालिटी चेक करने, बैटरी हेल्थ की निगरानी करने और सप्लाय चेन को ऑप्टिमाइज करने के लिए करती है।





